बेकरी फैक्ट्री के चौकीदार की मिलीभगत से अंदर काम कर रहे 3 वर्करों ने 25 बोरे बिस्किट चूरा कर लिया चोरी

Ludhiana Highlights | भाई मन्ना सिंह नगर स्थित बेकरी फैक्ट्री के चौकीदार की मिलीभगत से अंदर काम कर रहे तीन वर्करों ने 25 बोरे बिस्किट चूरा चोरी कर लिया। थाना डिवीजन नंबर चार पुलिस ने उनके खिलाफ केस दर्ज करके गिरफ्तार कर लिया है। सोमवार को उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहा से रिमाड हासिल करने के बाद कड़ी पूछताछ की जा रही है। एएसआइ सतनाम सिंह ने बताया कि आरोपितों की पहचान नेपाल के जिला कलाली के गाव गुड्डू सूरमा निवासी गोरखा तेज सिंह, उत्तर प्रदेश के जिला एटा के गाव मजदूनपुर निवासी योगेश, शिव कुमार तथा अशोक नगर

October 22, 2018

अमृतसर में हुए हादसे में सवालों के घेरे में आईं अपनी पत्‍नी के बचाव में उतर आए सिद्धू, कहा कि हादसे के लिए रेलवे जिम्‍मेदार

Ludhiana Highlights | स्थानीय निकाय मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू यहां जोड़ा फाटक के पास हादसे में 62 लाेगों के मारे जाने के मामले में पत्‍नी डॉ. नवजोत कौर सिद्धू के बचाव में खुलकर सामने आ गए हैं। सिद्धू ने कहा कि  रेलवे ट्रैक पर हुई मौतों के लिए रेलवे को जिम्मेदार है, मेरी पत्‍नी नहीं। उन्होंने कहा कि यह एक हादसा था, जो रेलवे की सतर्कता न होने की वजह से हुआ। उधर, शिरोमणि अकाली दल ने इस मामले में डाॅ. नवजोत कौर को भी दोषी ठहराया है और उनके खिलाफ केस दर्ज करने की मांग की है। पार्टी ने कहा

October 22, 2018

दुगरी इलाके में पिछले 30 सालों से 9 फ्लैटों पर नाजायज कब्जे को विधायक बैंस ने पुलिस से छुड़वाया

Ludhiana Highlights | दुगरी इलाके में ग्लाडा के 9 फ्लैटों से लुधियाना पुलिस द्वारा पिछले 30 सालों से नाजायज कब्जे को आज विधायक एवं लिप प्रमुख सिमरजीत सिंह बैंस ने छुड़वाया। फ्लैटों के असल मालिक ग्लाडा को इस जमीन का कब्जा सौंप दिया गया है। इस दौरान फ्लैटों के साथ लगते इलाका निवासियों ने बैंस को इस कार्य के लिए सम्मानित किया। विधायक बैंस ने कहा कि पुलिस की नाजायज धक्केशाही बर्दाश्त नहीं होगी, इसलिए उनको पंजाब निवासियों के साथ की जरूरत है। उन्होंने कहा कि किसी को नाजायज कब्जा नहीं करने दिया जाएगा, चाहे वह पुलिस अधिकारी क्यों न हो या

October 22, 2018

अब सैलरी पर पड़ेगी GST की मार, कंपनियां यू कम करेंगी अपना टैक्स बोझ?

अब आपकी सैलरी पर जीएसटी का असर दिखने जा रहा है। इकोनॉमिक टाइम्स ने दावा किया है कि इस असर के चलते देशभर की कंपनियां अपने कर्मचारियों के सैलरी पैकेज में बड़े बदलाव की तैयारी में हैं क्योंकि अब कर्मचारी की सैलरी का ब्रेकअप कंपनियों पर भारी पड़ेगा। शॉपिंग और रेस्टोरेंट बिल के बाद ये और बड़ा झटका होगा।

हाउस रेंट, मोबाइल और टेलिफोन बिल, हेल्थ इंश्योरेंस, मेडिकल बिल, ट्रांस्पोर्टेशन जैसे सैलरी का ब्रेकअप यदि जीएसटी के दायरे में आ जाएगा तो कंपनियों को आपकी सैलरी पैकेज को नए सिरे से निर्धारित करना होगा। टैक्स जानकारों ने कंपनियों को सलाह देना शुरू कर दिया है कि वह अपने एचआर डिपार्टमेंट को कर्मचारी के सैलरी ब्रेकअप को नए सिरे से समझने के लिए कहे। जानकारी है कि अथॉरिटी ऑफ एडवांस रूलिंग (एएआर) के हाल में दिए एक फैसले के बाद कंपनियां कर्मचारी की सैलरी को लेकर सजग हो गई हैं और वह अपनी टैक्स देनदारी बचाने के लिए नए सैलरी ब्रेकअप पर काम कर रही हैं। और एएआर ने एक खास मामले में फैसला दिया है कि कंपनियों द्वारा कैंटीन चार्जेस के नाम पर कर्मचारी की सैलरी से कटौती जीएसटी के दायरे में होगी। इस फैसले के बाद जानकारों का मानना है कि कंपनियों द्वारा कर्मचारियों की दी जा रही कई सुविधाएं जिसके ऐवज में सैलरी में कटौती की जाती है को जीएसटी के दायरे में कर दिया जाएगा। फिलहाल कंपनियां कर्मचारी को कॉस्ट टू कंपनी के आधार पर सैलरी पैकेज तैयार करती थी और कई सेवाओं के ऐवज में कटौती को सैलरी का हिस्सा बनाकर दिया जाता है। लेकिन अब यदि इसे जीएसटी के दायरे में लिया जाता है तो कंपनियां किसी कर्मचारी की कॉस्ट टू कंपनी को ही आधार रखते हुए उसके ब्रेकअप में बदलाव करेंगी जिससे कंपनी की टैक्स देनदारी पर कोई प्रभाव न पड़े.टैक्स जानकारों के मुताबिक कर्मचारियों की सैलरी में कई ऐसे ब्रेकअप शामिल रहते हैं जिनके ऐवज में कंपनियां सेवा प्रदान करती है और कर्मचारियों को इन सेवाओं के ऐवज में पेमेंट बिना किसी रसीद के मिल जाता था। इसके चलते टैक्स विभाग के लिए इन सेवाओं पर जीएसटी का अनुमान लगाना मुश्किल होता है और कंपनियां अपनी सुविधा पर अपना टैक्स बचाने के लिए कर्मचारियों की सैलरी ब्रेकअप तैयार करती हैं। लिहाजा, कंपनी द्वारा कर्मचारी को दी जा रही सेवाएं यदि जीएसटी के दायरे में आती हैं तो कंपनियों की कोशिश देश जीएसटी को भी कर्मचारी के कॉस्ट टू कंपनी में जोड़ दे जिससे उसकी टैक्स देनदारी पर असर न पड़े।